Dharma.OS
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भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य मुखारविन्द से निःसृत शाश्वत अमृत वाणी — सम्पूर्ण ७०० श्लोक, शास्त्रीय स्वर, और जीवन के प्रत्येक द्वन्द्व का प्रत्यक्ष कल्याणकारी समाधान।
Shloka 2.47
अध्याय 2 • श्लोक 47
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन…
"तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। अतः फल की आसक्ति त्यागकर निष्काम भाव से श्रेष्ठ कर्म करो।"
⚡ किसी भी मानवीय द्वन्द्व का सीधा गीता समाधान:
श्री राधा-कृष्ण युगल सरकार
ठाकुर श्री बांके बिहारी जी
श्री राधा रमण लाल जू
माँ गंगा व विश्वनाथ
हे श्री राधे! आप परम दयामयी एवं वृन्दावन की स्वामिनी हैं। आपके और श्री कृष्ण के युगल चरणों में हमारा कोटि-कोटि प्रणाम।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
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राधा वल्लभ दास
अभी-अभी"श्री राधा-कृष्ण युगल चरण अनुराग"
अमित शर्मा
१ मिनट पहले"परिवार में सुख-शान्ति, आरोग्य व कल्याण"
प्रिया वर्मा
४ मिनट पहले"विद्या, एकाग्रता एवं मन की स्थिरता"
गौरव कृष्ण
६ मिनट पहले"गुरु कृपा व आत्म-ज्ञान प्राप्ति"
कर्मयोग (१-६), भक्तियोग (७-१२) एवं ज्ञानयोग (१३-१८) का शाश्वत त्रिवेणी संगम
Arjuna's Dilemma
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन का विषाद, मोह और श्रीकृष्ण से शरणागति का प्रथम संवाद।
Transcendent Knowledge
आत्मा की अमरता, निष्काम कर्मयोग का सिद्धान्त और स्थितप्रज्ञ के लक्षण।
The Yoga of Action
कर्म की अनिवार्यता, यज्ञ चक्र और अनासक्त भाव से श्रेष्ठ कर्म का मार्ग।
The Yoga of Knowledge
अवतार का दिव्य रहस्य, ज्ञान की अग्नि और कर्म संन्यास का समन्वय।
The Yoga of Renunciation
संन्यास और कर्मयोग की एकता तथा आत्म-साक्षात्कार से परम शांति की प्राप्ति।
The Yoga of Meditation
अष्टांग ध्यान साधना, मन पर नियंत्रण और योगी की दिव्य अवस्था।
Knowledge & Wisdom
ईश्वर की परा और अपरा प्रकृति तथा चार प्रकार के भक्तों का वर्णन।
The Imperishable Brahman
अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति, ॐ का ध्यान और प्रयाणकाल (अंतिम समय) का स्मरण।
Sovereign Knowledge
परम गोपनीय राजविद्या, भक्ति का महात्म्य और योगक्षेम वहन करने का वचन।
Divine Manifestations
समस्त ब्रह्मांड में भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक विभूतियों का भव्य दर्शन।
The Universal Form
दिव्य चक्षु द्वारा भगवान के काल स्वरूप विराट विश्वरूप का साक्षात् दर्शन।
The Yoga of Devotion
सगुण और निर्गुण भक्ति तथा श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भक्त के दिव्य लक्षण।
The Field & Knower
प्रकृति (क्षेत्र) और आत्मा (क्षेत्रज्ञ) का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक भेद।
The Three Gunas
सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों का बंधन और गुणातीत बनने का मार्ग।
The Supreme Person
उलटे संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष का छेदन और पुरुषोत्तम तत्व का रहस्य।
Divine & Demonic Natures
दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का वर्गीकरण तथा काम-क्रोध-लोभ के नरक द्वार।
Three Divisions of Faith
त्रिविध श्रद्धा, आहार, यज्ञ, तप, दान और ॐ तत् सत् का मन्त्र महात्म्य।
Liberation Through Renunciation
त्याग और संन्यास का पूर्ण सार, सर्वधर्मान्परित्यज्य और शरणागति का महा-संदेश।