Dharma.OS
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Raga Ahir Bhairav on Low-Pitch Bansuri with 136.1 Hz Sacred Tanpura Drone (BPM: 50, Calming Meditation)
अहंकार द्वारा भविष्य के परिणामों पर पूर्ण नियंत्रण की चेष्टा, जिससे उत्पन्न भय ने बुद्धि को संशय और कर्म-पलायन के भंवर में धकेल दिया है।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣu kadācana | mā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo 'stv akarmaṇi ||
“तुम्हारा अधिकार केवल निष्काम भाव से कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। तुम स्वयं को कर्मों के फलों का कारण मत समझो, और न ही कर्म से विमुख होकर अकर्मण्यता में तुम्हारी प्रीति हो।”
करियर, स्टार्टअप अथवा परीक्षा के कुरुक्षेत्र में खड़ा एक व्यक्ति, जो इस भय से निर्णय नहीं ले पा रहा कि यदि वह असफल हुआ तो क्या होगा।
मस्तिष्क का केंद्र 'परिणाम' से हटाकर 'प्रक्रिया' (Process Mastery) पर स्थापित करें। परिणाम भविष्य में है और अनेक कारकों पर निर्भर है, जबकि कर्म वर्तमान क्षण में आपकी पूर्ण सामर्थ्य में है।
४ सेकंड श्वास अंदर लें (सचेत कर्तव्य); ४ सेकंड श्वास रोकें (स्थिर साक्षी भाव); ४ सेकंड श्वास बाहर छोड़ें (परिणाम का भय समर्पित); ४ सेकंड शून्य में ठहरें (परम शांति)।
Ready
पार्थ! हे मेरे प्रिय सखे, मेरी ओर देखो!
“तुम इस क्षण जिस मानसिक संताप और भय से घिरे हो, वह तुम्हारे सामर्थ्य की कमी नहीं, अपितु तुम्हारी दृष्टि का भ्रम है। तुम भविष्य की उन छायाओं से युद्ध कर रहे हो जो अभी अस्तित्व में ही नहीं हैं। सुनो सखे! जब तुम किसी कार्य को इस शर्त पर करते हो कि परिणाम तुम्हारी इच्छानुसार ही होना चाहिए, तब तुम अपने चित्त को अशांति के हवाले कर देते हो। फल की वासना को मुझे अर्पित कर दो। निष्काम होकर, पूर्ण उत्कृष्टता के साथ केवल अपने स्वधर्म का निर्वाह करो। उठो पार्थ! इस हृदय की दुर्बलता को त्यागो और कर्मक्षेत्र में सन्नद्ध हो जाओ!”
अगले 24 घंटों के लिए यह संकल्प लें: जिस एक आवश्यक कार्य को आप परिणाम के संकोच या विफलता के भय से टाल रहे हैं, उसे अगले 30 मिनट में प्रारंभ करें। कार्य करते समय जब भी मन में 'सफलता या विफलता' का विचार आए, तुरंत समवृत्ति प्राणायाम करें और अपना ध्यान केवल कार्य की गुणवत्ता पर रखें।