Dharma.OS
Dharma.OS
इस्कॉन के संस्थापक आचार्य हिज डिवाइन ग्रेस ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद के प्रामाणिक वैदिक दर्शन अनुसार सम्पूर्ण १८ अध्यायों का वीडियो सार, श्लोक पाठ एवं दिव्य श्रवण।
Chapter 1
अध्याय 1 • श्लोक 1
✦ अर्जुनविषादयोग — कुरुक्षेत्र युद्धभूमि पर अर्जुन का मोह व विषाद
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन का विषाद, मोह और श्रीकृष्ण से शरणागति का प्रथम संवाद।
Chapter 2
अध्याय 2 • श्लोक 1
✦ सांख्ययोग — आत्मा की अमरता और निष्काम कर्म का शाश्वत रहस्य
आत्मा की अमरता, निष्काम कर्मयोग का सिद्धान्त और स्थितप्रज्ञ के लक्षण।
Chapter 3
अध्याय 3 • श्लोक 1
✦ कर्मयोग — अनासक्त भाव से कर्तव्य पालन और यज्ञ चक्र
कर्म की अनिवार्यता, यज्ञ चक्र और अनासक्त भाव से श्रेष्ठ कर्म का मार्ग।
Chapter 4
अध्याय 4 • श्लोक 1
✦ ज्ञानकर्मसंन्यासयोग — दिव्य अवतार का रहस्य और ज्ञान यज्ञ
अवतार का दिव्य रहस्य, ज्ञान की अग्नि और कर्म संन्यास का समन्वय।
Chapter 5
अध्याय 5 • श्लोक 1
✦ कर्मसंन्यासयोग — संन्यास और कर्मयोग का दिव्य समन्वय
संन्यास और कर्मयोग की एकता तथा आत्म-साक्षात्कार से परम शांति की प्राप्ति।
Chapter 6
अध्याय 6 • श्लोक 1
✦ ध्यानयोग — मन पर पूर्ण विजय, अष्टांग योग और आत्म-साक्षात्कार
अष्टांग ध्यान साधना, मन पर नियंत्रण और योगी की दिव्य अवस्था।
Chapter 7
अध्याय 7 • श्लोक 1
✦ ज्ञानविज्ञानयोग — भगवान की परा और अपरा प्रकृति का विज्ञान
ईश्वर की परा और अपरा प्रकृति तथा चार प्रकार के भक्तों का वर्णन।
Chapter 8
अध्याय 8 • श्लोक 1
✦ अक्षरब्रह्मयोग — परम धाम की प्राप्ति और प्रयाणकाल का स्मरण
अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति, ॐ का ध्यान और प्रयाणकाल (अंतिम समय) का स्मरण।
Chapter 9
अध्याय 9 • श्लोक 1
✦ राजविद्याराजगुह्ययोग — परम गोपनीय ज्ञान और अनन्य भक्ति
परम गोपनीय राजविद्या, भक्ति का महात्म्य और योगक्षेम वहन करने का वचन।
Chapter 10
अध्याय 10 • श्लोक 1
✦ विभूतियोग — भगवान की अनन्त दिव्य विभूतियों का दर्शन
समस्त ब्रह्मांड में भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक विभूतियों का भव्य दर्शन।
Chapter 11
अध्याय 11 • श्लोक 1
✦ विश्वरूपदर्शनयोग — अर्जुन को भगवान के विराट विश्वरूप का दर्शन
दिव्य चक्षु द्वारा भगवान के काल स्वरूप विराट विश्वरूप का साक्षात् दर्शन।
Chapter 12
अध्याय 12 • श्लोक 1
✦ भक्तियोग — सगुण व निर्गुण भक्ति और प्रिय भक्त के लक्षण
सगुण और निर्गुण भक्ति तथा श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भक्त के दिव्य लक्षण।
Chapter 13
अध्याय 13 • श्लोक 1
✦ क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग — प्रकृति, पुरुष और चेतना का भेद
प्रकृति (क्षेत्र) और आत्मा (क्षेत्रज्ञ) का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक भेद।
Chapter 14
अध्याय 14 • श्लोक 1
✦ गुणत्रयविभागयोग — सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों का रहस्य
सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों का बंधन और गुणातीत बनने का मार्ग।
Chapter 15
अध्याय 15 • श्लोक 1
✦ पुरुषोत्तमयोग — संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष और परम पुरुषोत्तम
उलटे संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष का छेदन और पुरुषोत्तम तत्व का रहस्य।
Chapter 16
अध्याय 16 • श्लोक 1
✦ दैवासुरसंपद्विभागयोग — दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का विभाजन
दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का वर्गीकरण तथा काम-क्रोध-लोभ के नरक द्वार।
Chapter 17
अध्याय 17 • श्लोक 1
✦ श्रद्धात्रयविभागयोग — आहार, यज्ञ, तप और दान के तीन भेद
त्रिविध श्रद्धा, आहार, यज्ञ, तप, दान और ॐ तत् सत् का मन्त्र महात्म्य।
Chapter 18
अध्याय 18 • श्लोक 1
✦ मोक्षसंन्यासयोग — गीता का परम उपदेश: सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज
त्याग और संन्यास का पूर्ण सार, सर्वधर्मान्परित्यज्य और शरणागति का महा-संदेश।